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केंद्र की आपदा में जोखिम कम करने की कोशिश, पीएम एजेंडा के 10 बिंदुओं को राज्य में भी करेंगे लागू पढ़े पुरी खबर…

आर्यव्रत न्यूज़,जयपुर :- आपदा जोखिम को कम करने के लिए प्रधानमंत्री के सुझाव के अनुरूप तैयार कार्य बिंदुओं को राज्य में भी लागू किया जाएगा. राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण के निर्देश के बाद राज्य के आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग ने सम्बंधित विभागों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  एशियन मिनिस्ट्रीयल कांफ्रेंस के बाद आपदा में जोखिम कम करने के लिए कुछ सुझाव दिए थे. इन सुझावों पर कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण ने प्रधानमंत्री 10 बिंदू एजेंडा नाम दिया। इसके बाद राज्य सरकारों से इन बिंदुओं पर कार्रवाई करने के लिए लिखा गया. गृहमंत्रालय के राष्ट्रीय आपराध प्रबंध प्राधिकरण सदस्य सचिव जीवीवी शर्मा ने राज्यों के मुख्य सचिवों को इस सम्बंध में पत्र लिखा गया है. राज्यों में उद्योग, आईटी, नगरीय विकास, ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव, महिला बाल विकास, स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, जल संसाधन, गृह, आईटी, वन, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, सभी संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टरों को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है.

– उत्तराखंड में वर्ष 2016 में आई आपदा के बाद इन दस बिंदुओं को अंतिम रूप दिया गया.
– राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपेक्षा की गई है कि वो पीएम एजेंडा के इन 10 बिंदुओं पर कार्रवाई करें.
– सभी विकास क्षेत्रों को आपदा जोखिम प्रबंधन के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए.
– जोखिम कवरेज में गरीब घरों से लेकर मध्यमवर्ग तक, सभी शामिल होना चाहिए.
– आपदा जोखिम प्रबंधन में महिलाओं का नेतृत्व और अधिक भागीदारी बढनी चाहिए.
– प्रकृति और आपदा जोखिम की वैश्विक समझ में सुधार के लिए वैश्विक स्तर पर जोखिम मैपिंग में निवेश करें.
-आपदा जोखिम प्रबंधन प्रयासों की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना.
– आपदा से संबंधित मुद्दों पर काम करने के लिए विश्वविद्यालयों का एक नेटवर्क विकसित करना.
– आपदा जोखिम में कमी के लिए सोशल मीडिया और प्रौद्योगिकियों द्वारा प्रदान किए गए अवसरों का उपयोग करें.
– आपदा जोखिम में कमी के लिए स्थानीय क्षमता और पहल बनाएं.
– आपदा से सीखने के लिए हर अवसर का उपयोग करना और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, हर आपदा के बाद सबक पर अध्ययन होना चाहिए.
– आपदा के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया में अधिक सामंजस्य लाना.
– राज्यों से अपेक्षा की गई है कि वो अपनी आपदा प्रबंधन की योजनाओं में इन बिंदुओं को प्राथमिकता के साथ शामिल करें.

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