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श्रीगंगानगर: गरीब छात्रों को पढ़ाने के लिए युवाओं की पहल, धर्मशाला को बनाया शिक्षा का मंदिर पढ़े पुरी खबर…

आर्यव्रत न्यूज़,श्रीगंगानगर :- समाज के बीच कुछ अच्छा करने की ललक हो तो व्यक्ति यूं ही विशेष बन जाता है. शिक्षा ग्रहण करने के दौरान जहां युवा सामान्यत: अपनी पढ़ाई और घरों के कार्यों में हाथ बटाने तक ही सीमित रह जाते हैं, वहीं श्रीगंगानगर के सादुलशहर के तीन होनहार न सिर्फ अपना नाम ऊंचा कर रहे हैं, बल्कि कस्बे में बेहतर शिक्षा का माहौल पैदा करने की कवायद में जुटे हैं.

एमए बीएससी की पढ़ाई कर चुके युवा करीब 140 बच्चों को नियमित रूप से शिक्षा देने का काम कर रहे हैं. यह सिलसिला पिछले करीब छह माह से लगातार चल रहा है. युवाओं के इस सकारात्मक प्रयास की न सिर्फ कस्बे में बल्कि दूर दराज के क्षेत्रों में भी प्रशंसा हो रही है.

कहतें हैं किसी भी परिवार, समाज व देश की तरक्की करनी हो तो सबसे पहले वहां की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने की जरूरत होती है. नागरिक जब शिक्षित और जागरूक होगा तो स्वत: ही देश और समाज तरक्की के पथ पर अग्रसर होता है. इसी धारणा के अनुरूप अपने कस्बे को विशेष बनाने के लिए श्रीगंगानगर के सादुलशहर के तीन युवाओं ने ठान ली है. कस्बे के वार्ड 19 की धानक धर्मशाला में पिछले कई महीनों से एक शिक्षा केंद्र ऐसा भी लगता, जिसमें असहाय और गरीब परिवार के बच्चे पढ़ने आते हैं और इन बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दी जाती है. कस्बे के ही कुछ जागरूक युवाओं ने इसकी शुरुआत की है और इन लोगों ने स्वयं के संसाधनों द्वारा गरीब परिवार के बच्चों में शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प लेकर प्रयास शुरू किए हैं.

शिक्षा केंद्र में कस्बे के विभिन्न स्कूलों के बच्चों को स्कूल टाइम के बाद रोजाना दो से तीन घंटे शिक्षा दी जाती है. केंद्र चलाने वाले अध्यापक श्यामलाल ने बताया कि उन्होंने अपने जीवकाल में ऐसे बच्चों को देखा जिनके माता पिता नहीं है, या वे गरीबी के कारण पढ़ नहीं पाते या उन्हें स्कूल से निकाल दिया जाता है. उन्हीं बच्चों को शिक्षित करने के लिए उनके दिमांग में यह प्रेरणा आयी ओर उन्होंने यह केंद्र शुरू किया. जगह के लिए उन्होंने वार्ड में बानी धानक धर्मशाला के खाली कमरों को चुना. इन कमरों की साफ सफाई की और गेट ठीक करवाए और बच्चों को पढ़ना शुरू किया.

वहीं रमनदीप खंडा ने बताया की शुरुआत में तीस बच्चे थे और अब इनकी संख्या 130 तक पहुंच गयी है. इसके लिए कोई भी पैसा नहीं लिया जाता. उन्होंने बताया की कक्षा पांच से लेकर बारह तक के बच्चों को पढ़ाया जाता है. शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को नैतिक मूलयों के बारे में भी बताया जाता है.

पढ़ाई कर रहे बच्चों ने बताया की वे यहां आकर काफी खुश हैं. क्यूंकि उनकी आर्थिक स्तिथि ऐसी नहीं है की वे ट्यूशन ले सके या फिर बड़े स्कूलों में पढ़ सके. इस केंद्र पर निशुल्क पढ़ाई करवाई जा रही है, जिससे उन्हें काफी मदद मिल रही है.

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