राजस्थान

टोंक: दिव्यांग बलराम के हौसले को सलाम, पैदल तय किया 800 किमी का सफर पढ़े पुरी खबर…

आर्यव्रत न्यूज़,टोंक :- लॉकडाउन की वजह से प्रवासियों का राजस्थान में आने का सिलसिला लगातार जारी है. इस बीच, विदिशा निवासी दिव्यांग बलराम को जब कोई वाहन नहीं मिला तो उसने, बैसाखी के सहारे ही गुजरात के जामनगर से टोंक के देवली तक का सफर पूरा किया.

जानकारी के मुताबिक, गुजरात के जामनगर में मजदूरी करने वाला युवक एक पांव से बैसाखी के सहारे 800 किलोमीटर चलकर टोंक जिले के देवली पहुंच गया. दरअसल, कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण के फैलने के भय से, देश में लगाए गए लॉकडाउन (Lockdown) के चलते सरकारी व निजी वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा था.

सैकड़ों लोग प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में फंसे गए थे. इन लोगों को अपने घरों तक जाने के लिए न तो वाहनों की सुविधा मिल रही और न ही, मकानों का किराया देने के लिए जेब में पैसे बचे हैं. इनमें से सबसे अधिक परेशानी मजदूर तबके के लोगों को झेलनी पड़ी.

इनके पास न तो बिना दिहाड़ी के रहने की सुविधा रही और न ही खाने-पीने के लिए पर्याप्त मात्रा में धन की उपलब्धता. ऐसी ही समस्या से जूझ रहे मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के मजदूर ने साहस दिखाते हुए, जामनगर से देवली तक का सफर मजबूरी में पैदल ही तय कर लिया.

विदिशा जिले का निवासी बलराम एक पैर से दिव्यांग है. फिर भी उसके हौसले सातवें आसमान पर हैं. मजबूरी व परिस्थितियों ने बलराम को करीब 800 किलोमीटर का सफर पैदल करने पर मजबूर कर दिया. दिव्यांग बलराम ने भी हिम्मत नहीं हारी तथा बैसाखी के सहारे जामनगर से लगातार 14 दिन का पैदल सफर तय कर, देवली तक का रास्ता पूरा किया.

पैदल चलकर देवली पहुंचने पर मेहरानगढ़ होटल के सामने ड्यूटी पर तैनात, हेडकांस्टेबल रणजीत सिंह मीणा ने उसे खाना खिलाया और रास्ते के लिए बिस्किट आदि के पैकेट दिए. वहीं, उसे विदिशा उसके घर तक पहुंचाने के लिए कोटा भेजने का प्रबंध किया.

बलराम ने बताया कि, वह जामनगर में रहकर एक फैक्ट्री में बोल्ट कसने का कार्य करता था. जामनगर से पैदल देवली तक आ गया. अब अगर वह कोटा पहुंच जाएगा तो वहां से, ट्रेन या अन्य किसी साधन से विदिशा चला जाएगा. एक दिव्यांग श्रमिक की सहायता के लिए मेल नर्स खेमराज चौधरी व चिकित्सा दल ने भी मदद को हाथ बढ़ाए और किराए के लिए कुछ राशि एकत्र कर उसे दी. इसके बाद में उसे कार में बैठाकर कोटा के लिए रवाना कर दिया गया. यहां से वह ट्रेन में बैठकर अपने गंतव्य स्थल तक पहुंच जाएगा.

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